शुभारंभ
Friday, 18 January 2013
कितने दुर निकल गये रिस्ता निभाते निभाते .......
खुद को खो दिया अपनों को पाते पाते ......
लोग कहते है दर्द है मेरे दिल में .........
और मैं थक गया मुस्कुराते - मुस्कुराते ।।
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